एसटी-एससी, ओबीसी लगा रहे त्रिवेदी, गौड़ और झा सरनेम

ByUpendra Prasad

एसटी-एससी, ओबीसी लगा रहे त्रिवेदी, गौड़ और झा सरनेम

उपाध्याय, पांडेय, भार्गव, गौड़, त्रिवेदी, झा, तोमर, बघेल, भदौरिया, गोयल और व्यास… ये वे उपनाम (सरनेम) हैं, जिनकी वजह से पीएससी इन दिनों परेशान है। हाल ही में जारी पीएससी 2013 की चयन सूची जारी होने के बाद उसे दोबारा इन सरनेम वाले परीक्षार्थियों के परिणाम निकालकर जांचने पड़ रहे हैं।

गलत परिणाम घोषित करने के आरोपों में घिरे रहने वाले पीएससी ने इस बार पारदर्शिता लाने की काफी कोशिश की थी। बावजूद इसके इस बार भी बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंचीं। अधिकांश में यह आरोप था कि पीएससी ने आरक्षित कोटे की सीटों में सवर्णों को प्रवेश दे दिया। शिकायत सामने आते ही पीएससी में हड़कंप मच गया। सूत्रों के मुताबिक आरक्षित वर्ग के कोटे में सवर्णों में पाए जाने वाले सरनेम वाले परीक्षार्थी थे, उनकी कॉपियां और दस्तावेज दोबारा खुलवाए गए।

चयन सूची में शामिल कुछ खास सरनेम को आरोप लगाने वालों ने जिन नामों को आधार बनाकर पीएससी को शिकायत की है वे निम्न है। योगेश कुमार उपाध्याय, आलोक पांडेय, अग्नीश गोयल ,सौरभ तोमर, कीर्ति बघेल, बरखा गौड़ और आशा भार्गव जैसे उम्मीदवारों को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग में आरक्षण का लाभ देते हुए चयनित किया गया है। ऐसे ही मीना झा, अजय झा नामक उम्मीदवारों को भी ओबीसी श्रेणी का लाभ दे दिया गया है।

आरोप लगाया जा रहा है कि सभी सरनेम सवर्ण जातियों के हैं। ऐसे में चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी कर सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को लाभ दे दिया गया है। इन उपनाम वाले अन्य उम्मीदवार चयन सूची में सामान्य श्रेणी में ही चुने गए हैं।

जांच के बाद पाया गया कि सूची में 21 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके सरनेम सर्वणों में पाए जाने वाले सरनेम जैसे ही हैं लेकिन उनके दस्तावेजें के मुताबिक वे आरक्षित वर्ग में ही आते हैं। इसी आधार पर आरक्षित वर्ग में उनका चयन हुआ। यह असमंजस इस वजह से भी ज्यादा था कि एक समान सरनेम वालों में कुछ का चयन तो सामान्य वर्ग में हुआ, जबिक कुछ के चयन में जातिगत आरक्षण का उल्लेख था।

सरनेम नहीं, सर्टिफिकेट आधार

सरनेम के आधार पर किसी को आरक्षित या अनारक्षित नहीं माना जा सकता। आरक्षित वर्ग में चयनित हर उम्मीदवार के जाति प्रमाण-पत्र का सत्यापन इंटरव्यू से पहले ही हो चुका है। आरक्षण के लिए शासन द्वारा नियमानुसार जारी जाति प्रमाण-पत्र मान्य होता है, न कि सरनेम। -मनोहर दुबे, सचिव पीएससी

 

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